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जब जापान की इंपीरियल आर्मी कोलकाता पर बम गिराए थे

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 बात 1942 की है। दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। ब्रिटेन, अमेरिका समेत पश्चिमी देशों का गठबंधन जापान, जर्मनी जैसे देशों के खिलाफ युद्ध लड़ रहा था। भारत ब्रिटेन का उप-निवेश था। ब्रिटेन भारत की जमीन का इस्तेमाल युद्ध के दौरान अपने सहयोगियों तक मदद पहुंचाने में कर रहा था। इसका नतीजा ये रहा कि आज ही के दिन 1942 में जापान की इंपीरियल आर्मी एयरफोर्स ने कोलकाता पर बम गिराए थे। आधी रात को की गई बमबारी की वजह से शहर की कई अहम इमारतें तबाह हो गईं थीं। दरअसल, जापान से चीन लोहा ले रहा था। चीन को युद्ध का सामान ब्रिटेन, अमेरिका पहुंचाते थे। और उसके लिए एक ही रास्ता था, जो भारत से होकर जाता था। जापान इस सप्लाई चेन को तोड़ना चाहता था। इसलिए उसने कोलकाता पर हमला कर दिया। भारत का एयर डिफेंस सिस्टम दिन में बहुत मजबूत था। इसलिए जापान ने बम गिराने के लिए रात का समय चुना। इस हमले में जापानी एयरफोर्स ने हावड़ा ब्रिज और बंदरगाह को निशाना बनाया था, जो उस वक्त दुनिया के सबसे बड़े पुल की लिस्ट में तीसरे नंबर पर था। हालांकि, अंधेरा होने की वजह से यह बम हावड़ा ब्रिज पर नहीं गिरे, बल्कि एक होटल के ऊपर गिरे थे। उस...

जहानाबाद के पूर्वी सरेन में बंपर उपज से गदगद हुए किसान !

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      पूर्वी सरेन में क्रॉप कटिंग का आयोजन इन दिनों बिहार में गेहूं की फसल की कटाई जोर शोर से चल रही है सभी किसान अपने अपने खेत में फसल की कटाई शुरू कर दी है ! गेहूं की फसल (Wheat Crop) पककर तैयार हो गई है। इन पके फसलों को देखकर लगता है जैसे प्रकृति ने सुनहरी चादर बिछा रखी हो। किसान भी लहलहाती फसलों को देखकर गदगद हैं। वे अच्छी पैदावार की उम्मीद में हैं। क्रॉप कटिंग में की गई गणना से इसकी पूरी संभावना है कि इस बार उपज अच्‍छी होगी।  सांख्यिकी विभाग की ओर से हर साल फसल की कटनी करवाकर उपज का आकलन किया जाता है। रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जाती है ।  इसी फसल कटाई के तहत आज गुरुवार को जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड के पूर्वी सरेन के नारायनपुर मे किसान कविता कुमारी के खेत में कृषि विभाग एवं आत्मा के तहत रवि फसल गेहूं की क्रॉप कटिंग का आयोजन किया गया !  इस क्राप कटिंग में प्रखंड कृषि पदाधिकारी नागेश्वर मांझी प्रखंड तकनीकी प्रबंधक राम विवेक मिश्रा कृषि समन्वयक सत्येंद्र नारायण गौतम, किसान सलाहकार नंद किशोर कुमार के नेतृत्व में कराया गया ! यह कटिंग 10×5 वर्ग मीटर...

मखदुमपुर के अकौना गांव में गेहूं की क्रॉप कटिंग

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  मखदुमपुर के अकौना गांव में गेहूं की क्रॉप कटिंग बिहार सरकार द्वारा अपने किसानों को अधिक से अधिक फसल  उपजाने  हेतु  समय-समय पर किसान सलाहकार कृषि समन्वयक के माध्यम से उन्नत बीजों की आपूर्ति, सिंचाई पर सब्सिडी, कृषि फसलों का चयन, कीटनाशकों का प्रयोग इत्यादि पर अधिक ध्यान दिया गया है ! सरकार की  कोशिश रहती है की  अन्नदाता किसान अपने  आवश्यकता के साथ-साथ दूसरे लोगों  की भी आवश्यकता की पूर्ति कर सकें , इसलिए वह जीत तो मेहनत करते हैं ! सनद रहे कि बिहार में रबी फसलों की कटाई जोरों से चल रही है इस रवि फसल में खासकर गेहूं की कटाई किसानों के द्वारा किया जा रहा है बिहार में सामान्यतः गेहूं फसलों की कटाई मार्च अप्रैल महीने में की जाती है ! मंगलवार को मखदुमपुर प्रखंड के विभिन्न पंचायत में कृषि विभाग के निर्देशन में पंचायत स्तर पर क्रॉप कटिग का कार्य पूरा कर लिया गया है। जानकार सूत्रों के मुताबिक क्रॉप कटिग के बाद इस बार गेहूं का उत्पादन 33 फीसदी कम होने का अनुमान लगाया गया है। गेहूं फसल कटनी प्रयोग   प्रखंड मखदुमपुर के पंचायत मकरपुर के ग्राम अकौना ...

इंटरव्यू में फेल बिहार के युवक की कहानी दिल खुश कर देगी !

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  चलता रहूंगा पथ पर ,  चलने में माहिर बन जाऊंगा  या तो मंजिल मिल जाएगी  या अच्छा मुसाफ़िर बन जाऊंगा ! जी हां ! आपने ठीक पढ़ा ! जो लोग हिम्मत करते हैं, वे मिसाल बन जाते हैं, तरक्की की दुनिया में आगे बढ़ जाते हैं ! ऐसे ही भारत में लाखों लोग हिम्मती हैं जो अपने हिम्मत के बल पर निरंतर आगे बढ़ जाते हैं ! ऐसे ही एक कहानी बिहार के मधेपुरा जिले का दिलखुश कुमार का है ! आज दिलखुश कुमार Aryago कंपनी के फाउंडर हैं जिन्हें एक इंटरव्यू में आईफोन का लोगो नहीं पहचान पाने के कारण नौकरी नहीं मिली थी ! आज वह कई लोगों को नौकरी मुहैया करा चुके हैं , दिलखुश कुमार ने अपनी कहानी को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए हैं जो उन्हीं की भाषा में हुबहू हम यहां लिख रहे हैं :-  लंबी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है साहब आज मैं अपने ड्रीम फ़ोन iPhone 11 (256 GB) का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, अमेज़न वाले को इसे आज डिलीवर करना देना था, जैसे जैसे समय बीत रहा था, मिलने की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, अंततः आज 4 बजे मिलन हो ही गया.  आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व सहरसा में जॉब मेला लगा था. मैं भी बेरोजगार की श्रे...

सनातन धर्म लोगों को वाकई बेवकूफ बनाता है ?

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 एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक #फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा कि.. "मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।" पंडित जी के पूछने पर उस फकीर ने कहा कि...  जब आपके चढ़ाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा। इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।" यह मनगढ़ंत कहानी सुनाकर एक इंजीनियर मित्र जोर से ठठाकर हँसने लगे और मुझसे बोले कि -  "सब पाखण्ड है जी..!" शायद मैं कुछ ज्यादा ही सहिष्णु हूँ...  इसीलिए, लोग मुझसे ऐसी बकवास करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं है क्योंकि, पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूँ... उसके बाद उसे जबाब देता हूँ। खैर... मैने कुछ कहा नहीं .... बस, सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया...  और, अपने कान से लगा लिया। बात न हो सकी... तो, उस इंजीनियर साहब से शिकायत की। इस पर वे इंजीनियर साहब भड़क गए। और, बोले- " ये क्या मज़ाक है...??? 'कैलकुलेटर' में मोबाइल का फंक्शन भला कैसे काम करेगा..???" तब मैंने कहा.... तुमने सही कहा... वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि.... स्थूल शरीर छोड़ चु...

लोको पायलट का ड्राइविंग कब आसान होती है !

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  लोकोमोटिव में प्रकाश के Twin बीम के साथ एक शक्तिशाली हेड लाइट होती है जो ट्रैक पर लोको पायलट के दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है। व्यावहारिक रूप से, रात में ड्राइविंग दिन के समय की तुलना में आसान है। ड्राइवर बहुत दूर से सिग्नल देख सकता है जो ड्राइविंग में बहुत मदद करता है। और लुक आउट caution एक विशेष प्रकार की caution है जो केवल दिन के समय में होता है।  लुक आउट  कौशन रात में नहीं रहने से ड्राइविंग में लोको पायलट को बहुत मदद मिलता है ! रात में मवेशियों की संभावना कम हो जाती है, यह ड्राइविंग के लिए भी बहुत उपयोगी है। रात में लाइन पर काम करने वाला कोई पीडब्लूआई ट्रैकमैन नहीं होता है। जो ड्राइविंग के लिए मदद करता है। इसलिए दिन के समय के बजाय रात में ड्राइविंग करना आसान है ! आप एक्सप्रेस ट्रेन में रात को भी यात्रा करते समय, दरवाजे पर खड़े होकर देख सकते हैं काली अंधेरी रात में अंधेरा को चीरते हुए ट्रेन बीम लाइट रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ और पटरी पर तेज गति से चलते हुए ट्रैक के आगे लगभग आधा किलोमीटर तक फैला होता  है ! इस अंधेरी रात में गार्ड और लोको पायलट वॉकी टॉकी पर आपस में बा...

काश ! मैं भी प्रधानमंत्री होता

 माननीय आडवाणी जी को 2014 में पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया? आम जनता के मन में यह प्रश्न हमेशा उठता होगा !  उस वक्त उनके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई थी के वे प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए ! पिछले दो लोकसभा चुनावों में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थी और दोनों चुनाव हार गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में, लालकृष्ण आडवाणी को एक पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार को जीतने और सरकार बनाने में सफल नहीं थी। नरेंद्र मोदी, जो एक पीएम के रूप में पेश होने से पहले मुख्यमंत्री थे, एक गतिशील और स्वच्छ छवि के नेता थे। वह युवा पीढ़ियों में बहुत लोकप्रिय थे। उस समय में बेहतर विकास और प्रगति के लिए संपूर्ण भारत में गुजरात मॉडल बहुत लोकप्रिय था। मोदी ने चौतरफा भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी के साथ उनकी कनेक्टिविटी बहुत फलदायी दिख रही थी और भाजपा सरकार के पक्ष में कहानी कह रही थी।  इसलिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने फैसला किया कि नरेंद्र मोदी 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। ल...