न्यायिक कर्मचारियों का सरकार को अल्टीमेटम, 7 अक्टूबर को काली पट्टी दिवस
न्यायिक कर्मचारियों का सरकार को अल्टीमेटम, 7 अक्टूबर को काली पट्टी दिवस
मांगें नहीं मानी गईं तो 2 नवंबर से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी
पटना, 9 अगस्त। बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक कर्मचारियों ने अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर रविवार को पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर सभा कर सरकार को आंदोलन तेज करने का संकेत दिया। बिहार व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने घोषणा की कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 7 अक्टूबर को राज्यभर के व्यवहार न्यायालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 2 नवंबर से सामूहिक अवकाश पर जाने का प्रस्तावित कार्यक्रम है।
संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने कहा कि न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वर्षों से उनकी प्रोन्नति, वेतन विसंगति, कैडर पुनर्गठन, भत्ते, स्थानांतरण, अनुकंपा नियुक्ति, स्वास्थ्य सुविधा और पेंशन समेत कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
संघ ने न्यायालय सहायकों का एक जनवरी 2006 से कैडर पुनर्गठन करते हुए 4,600 रुपये ग्रेड पे में वेतन पुनरीक्षण की मांग की। इसके साथ ही लंबित प्रोन्नति मामलों के तत्काल निष्पादन और नियमित प्रोन्नति के स्थान पर जबरन एमएसीपी दिए जाने की व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठाई गई।
कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन, स्पष्ट कार्यदायित्व और पृथक न्यायिक कर्मचारी कैडर, शेट्टी आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप वेतन एवं भत्तों का पुनरीक्षण तथा गृह जिला या प्रमंडल के भीतर पारदर्शी ऑनलाइन स्थानांतरण एवं पदस्थापना व्यवस्था लागू करने की मांग की।
अन्य मांगों में शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्ति, निःशुल्क हेल्थ कार्ड एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता तथा बिहार में पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है। कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।
महासचिव सत्यार्थ सिंह ने कहा कि संघ का उद्देश्य न्यायिक कार्य को बाधित करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने सरकार से दो नवंबर से पहले उच्चस्तरीय वार्ता कर मांगों का समयबद्ध समाधान करने की अपील की।
संघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

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