Sunday, 15 February 2026

न्याय के प्रहरियों का न्याय के लिए शंखनाद: बिहार के सिविल कोर्ट कर्मचारियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल

 न्याय के प्रहरियों का न्याय के लिए शंखनाद: बिहार के सिविल कोर्ट कर्मचारियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल

पटना | 15 फरवरी 2026

बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का औपचारिक ऐलान कर दिया है। संघ के अध्यक्ष श्री राजेश्वर तिवारी के नेतृत्व में पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत पत्र भेजकर अधीनस्थ अदालतों में व्याप्त 'घुटन और बेबसी' की स्थिति से अवगत कराया गया है।




​20 वर्षों का इंतजार और मानसिक यातना:

संघ के अध्यक्ष श्री राजेश्वर तिवारी और महासचिव श्री सत्यार्थ सिंह ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों में कर्मचारी अमानवीय परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। पिछले दो दशकों से प्रोन्नति का न मिलना, वेतन विसंगतियां और पदों का वर्गीकरण न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अभिलेखों के अत्यधिक भार और संसाधनों की कमी ने न्यायिक कार्य को 'मानसिक यातना' बना दिया है। इसके अलावा, अनुकंपा नियुक्ति में हो रहे विलंब ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक बदहाली में झोंक दिया है।

​उच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद:

अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने स्पष्ट किया कि विधि विभाग के पत्राचारों के अनुसार, वेतन और प्रोन्नति का मामला अब केवल माननीय उच्च न्यायालय के प्रशासनिक स्तर पर लंबित है। पूर्व के आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में गहरा रोष है। विवश होकर संघ ने 01 मार्च से मौन सत्याग्रह और 06 अप्रैल से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है।

इन परिस्थितियों में, संघ को अत्यंत विवश होकर कर्मचारियों के संवैधानिक एवं विधिसम्मत अधिकारों की रक्षा हेतु शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक एवं लोकतांत्रिक चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा है, जिसकी रूपरेखा निम्नलिखित है-

01 मार्च 2026 - सभी जिला मुख्यालयों पर महात्मा गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष मौन बैठक एवं काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण उपस्थिति ।


15 मार्च 2026 - जिला मुख्यालयों पर एक दिवसीय भूख हड़ताल एवं मौन धरना, साथ ही संबंधित प्राधिकारों को ज्ञापन प्रेषण ।


28 मार्च 2026 - एक दिवसीय सामूहिक अवकाश एवं राज्यस्तरीय प्रेस विज्ञप्ति ।


06 अप्रैल 2026 से मांगों की पूर्ति न होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश ।


ये आंदोलन पूर्णतः अहिंसात्मक, अनुशासित एवं न्यायालय की गरिमा के अनुरूप होगा। न्यायालय परिसर की मर्यादा, न्यायिक परंपराओं एवं विधिक दायित्वों का पूर्ण सम्मान रखा जाएगा।


बैठक में उपलब्ध अभिलेखों एवं राज्य सरकार के विधि विभाग, बिहार द्वारा निर्गत पत्रों के अवलोकन से यह तथ्य निर्विवाद रूप से स्पष्ट हुआ कि न्यायिक कर्मचारियों के वेतन, प्रोन्नति एवं वेतन पुनरीक्षण से संबंधित मामला राज्य सरकार के किसी विभाग में लंबित नहीं है, अपितु यह विषय केवल माननीय उच्च न्यायालय, पटना के स्तर पर विचाराधीन है।




से उल्लेखित है कि व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों के सेवा-शर्त, प्रोन्नति एवं वेतन संबंधी विषय माननीय उच्च न्यायालय, पटना के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन हैं तथा इस संबंध में आवश्यक निर्णय उच्च न्यायालय स्तर से ही लिया जाना है।


उक्त पत्राचार से यह भी स्पष्ट है कि विधि विभाग द्वारा संबंधित पत्र माननीय उच्च न्यायालय, पटना को आवश्यक कार्रवाई एवं निर्णय हेतु अग्रसारित किए जा चुके हैं। फलस्वरूप, आदेशों के अनुपालन में हो रहे विलंब के कारण न्यायिक कर्मचारियों को प्रत्यक्ष एवं निरंतर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। अतः यह तथ्य अभिलेखों से स्वतः सिद्ध है कि न्यायिक कर्मचारियों की वेतन, प्रोन्नति एवं वेतन पुनरीक्षण संबंधी लंबित मांगों पर अंतिम निर्णय माननीय उच्च न्यायालय, पटना के स्तर पर अपेक्षित है।

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