पद और प्रतिष्ठा पाते ही भूल जाती है अपनी औकात इस तरह की पत्नियां

 पद प्रतिष्ठा पाते ही भूल जाती है अपनी औकात इस तरह की पत्नियां

आजकल सोशल मीडिया से को भी तस्वीर सामने आ रहे हैं, उसे पढ़कर और देखकर भौचक रह जायेंगे। ज्यादातर घटनाओं में पति अपने पत्नी के द्वारा छली जाती रही है। आखिर ज्यादातर पत्नियां सही होती है लेकिन अब जिसप्रकार का सोशल मीडिया में पीसीएस अधिकारी का ट्रैंड कर रहा है उस प्रकार अपनी पत्नी को कौन पढ़ाएगा। ये समाचार www.operafast.com पर पढ़ रहे हैं।



वह तुम्हारे संपत्ति और शरीर देखेगी पर तुम चरित्र देखकर शादी करना ।

पति ने सोचा था कि उसकी पत्नी पढ लिखकर बड़ी अधिकारी बन जाएगी तो दोनों की जिंदगी और बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा । पत्नी एसडीम बनकर अपने लेवल का पति ढूंढ कर इश्क फरमाने लगी अब बेचारा पति रोते हुए पछता रहा है ।

बड़े बुजुर्ग गलत नहीं कह गए।

         
वास्तविक घटना

जब पद और प्रतिष्ठा मिल जाता है तो अपनी औकात भूल जाती है

यू0पी0 के बरेली की एक PCS अधिकारी है ज्योति मौर्या जिनका पति एक सफाई कर्मचारी है शादी से पहले ये कुछ नहीं थी। पति गरीबी मे भी पढ़ा लिखा कर इन्हें PCS बना दिया । कुछ दिन पहले मैडम का नाम मिडिया में जोरो शोरो से उछलने लगा था। इनका अफेयर चल रहा था एक PPS कमानडेंट मनीष दुबे के साथ। लव यु लव यु खेल रही थी I

तभी सफाई कर्मचारी पति आरोप लगाता है अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर मैडम ह्त्या की साजिश रह रही है । मिडिया मे रायता फ़ैल गया, तो मैडम कह रही मै तलाक चाहती हुँ इसने मेरा व्हाट्सअप हैक किया है। मुझसे 50 लाख रूपये और घर मांग रहा है I उसपर मैडम प्रयागराज मे FIR भी करवा दी है I

जिस प्रकार हजारों हत्यारे आतंकवादियों का एक ही मजहब के होने के बाबजूद आतंकवाद का कोई मजहब निर्धारित नही हो सका है।

उसी प्रकार अनेकों मौकापरस्त मतलबी पत्नियों की घटनाएं सामने के बाद भी पत्नी बेचारी, लाचार, शोषित, पीड़ित, दमित ही होती है। और कोर्ट और कानून की नजर में पति ही अत्याचारी माना जाता है।

आजकल अधिकांश बहुओं के द्वारा आते ही सास- ससुर को साइड कर दिया जाता है, और अलग घर लेकर रहने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया जाता है ताकि

- सुबह सुबह जागना ना पड़े।

- घूंघट ना करना पड़े।

- स्वतंत्रता के नाम पर अश्लील ढंग से रहने की छूट मिल सकें।

- सिंदूर छोटी/बिना सिंदूर करने पर कोई ना टोके

- भक्ति पूजा उपवास को कोई ना कहे ।

- पति का पैर दबाना दूर बल्कि उल्टे उसी से घरेलू नौकर की तरह काम करवाया जा सके।

- मोबाईल की दुनिया में घंटो समय बिताया जा सके।

- ऑनलाइन शॉपिंग, आउटडोर डिनर, मल्टीप्लेक्स मूवी, यूरोपियन स्टाईल लाइफ जीया जा सके।

  
- पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, नानवेज ऑनलाइन आर्डर कर फिर पलंग पर पेपर बिछाकर खाया जा सकें।

ऐसे ही अनेकों पारिवारिक जिम्मेदारियों के पालन से बचा जा सके और परंपरागत कर्त्तव्यों और सांस्कृतिक मान्यताओं को तिलांजलि दी जा सके।

बात कड़वी लेकिन सत्य है। आजतक एक ऐसी पढ़ी लिखी, नौकरीपेशा पत्नी के बारे में नही सुना, जिसने गंवार पति को पढ़ा- लिखा कर लायक बनाया हो।

कभी कभी आचार्य चाणक्य की बात सही ही लगती है अपनी माँ के अलावा किसी औरत पर भरोसा मत करो। जो आज मजबूर दिख रही कल वो मजबूत होते ही आपको लात मार देंगी। चाँद के पार चलो वालो से भी दर्दनाक वास्तविक कहानी है ।

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