कश्मीर दंगा के 15 दोषियों पर UAPA लगाने का आदेश, जानें द कश्मीर फाइल्स की कमाई और एक्टर्स ने कितना फीस लिया

 

कश्मीर दंगा के 15 दोषियों पर UAPA लगाने का आदेश, जानें द कश्मीर फाइल्स की कमाई और एक्टर्स ने कितना फीस लिया

फिल्म द कश्मीर फाइल्स जब से रिलीज हुई है तभी से चारों तरफ सिर्फ इसकी ही चर्चा है। फिल्म देखने सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ रही है। हालात ये है कि लोगों को फिल्म के लिए लंबा इंतजार तक करना पड़ रहा है। 11 मार्च को रिलीज हुई इस की जहां हर तरफ तारीफ हो रही है वहीं, फिल्म ने कमाई के मामले में कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। 11 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म ने अभी तक करीब 217 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है ! ये न्यूज www.operafast.com पर पढ़ रहे हैं ।


दिन वार कलेक्शन

पहला दिन – 3.55 करोड़

दूसरा दिन- 8.50 करोड़

तीसरा दिन – 15.1 करोड़

चौथा दिन – 15.05 करोड़

पांचवां दिन- 18 करोड़

छठा दिन – 19.05 करोड़

सातवां दिन – 18.07 करोड़

पहला हफ्ता कुल – 97.3 करोड़ रुपये कमाई

आठवां दिन – 19.15 करोड़

नौवा दिन- 24.8 करोड़

दसवां दिन- 26.2 करोड़

ग्यारहवां दिन – 12.4 करोड़

बारहवां दिन – 12.25 करोड़

तेरहवां दिन – 8.00 करोड़

चौदहवां दिन – 7.50 करोड़

कुल – 206.57 करोड़ रुपये।


ये फिल्म गुरुवार को 200 करोड़ के क्लब में शामिल हो चुका है। बता दें कि इस फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी और दर्शन कुमार लीड रोल में है। इस फिल्म में काम करने के लिए अनुपम ने 1 कोरड़ रुपए चार्ज किए।


पुष्कर नाथ पंडित के रोल में अनुपम खेर


फिल्म द कश्मीर फाइल्स में अनुपम खेर ने पुष्कर नाथ पंडित का किरदार निभाया है। फिल्म में उनके काम की खूब तारीफ भी हो रही है। वैसे, अनुपम की गिनती उन स्टार्स में की जाती है जो किसी भी तरह का किरदार निभाने में माहिर होते है।

टाइम्स के अनुसार फिल्म में काम करने के लिए जहां अनुपम खेर को एक कोरड़ रुपए फीस मिली वहीं मिथुन चक्रवर्ती को डेढ़ करोड़ रुपए दिए गए। वहीं, पल्लवी जोश को 50-70 लाख रुपए दिए गए तो दर्शन कुमार को 45 लाख रुपए फीस मिली। आपको बता दें कि इस फिल्म को 14 कोरड़ रुपए के बजट में बनाया गया है।


निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म “द कश्मीर फाइल्स” हाल ही में रिलीज हुई है और रिलीज होते ही यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यह फिल्म ना सिर्फ भारतीय सिनेमा में एक नया मानदंड स्थापित कर रही है बल्कि विश्व स्तर पर भी रिकॉर्ड तोड़ रही है। 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई द कश्मीर फाइल्स ब्लॉकबस्टर साबित हो रही है। यह फिल्म कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर आधारित है।

द कश्मीर फाइल्स” फिल्म ने समाज में प्रकाश का काम किया है और सालों से छिपा सच इस फिल्म के माध्यम से बाहर लाया गया है। अब कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक जैसे कुख्यात आतंकी, जो भारत से कश्मीर को अलग करने की वकालत करता था, उसकी सोच और 90 के दशक में किए गए कृत्यों का पर्दाफाश इसी फिल्म के घटनाक्रमों में सारगर्भित करके दर्शाया गया है।

आपको बता दें कि 1990 में एक हमले के दौरान भारतीय वायु सेना के चार कर्मियों की हत्या का आरोप मार्च 2020 में यासीन मलिक पर लगाया गया था और वर्तमान में वह ट्रायल के तहत जेल की सलाखों के पीछे बंद है परंतु अब तक उस पर UAPA नहीं लगाया गया था, पर अब NIA कोर्ट ने उस पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के अंतर्गत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने के आदेश दे दिए हैं

90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सबसे अहम भूमिका जम्मू कश्मीर के लिबरेशन फ्रंट का मुखिया यासीन मलिक की थी। फिल्म “द कश्मीर फाइल्स” में ऐसे ऐसे सींस हैं जिन्होंने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है। कोर्ट के द्वारा लिए गए इस फैसले का सभी ने स्वागत किया है।


अदालत की तरफ से ऐसा कहा गया है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी और उसकी प्रेरणा इसने एडॉल्फ हिटलर की पसंद की प्लेबुक और ब्राउन शर्ट्स के मार्च से ली थी- नाजी पार्टी की मूल अर्धसैनिक शाखा जिसने 1920 के दशक में हिटलर के सत्ता में आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


विशेष न्यायाधीश परवीन सिंह ने कहा कि साजिश में आईएसआई जैसे पाकिस्तानी एजेंसियों के रूप में सीमा पार से भी अहम भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर को अलग करने के अंतिम उद्देश्य के साथ रक्तपात, हिंसा, तबाही और विनाश की एक दुखदाई गाथा का उल्लेख इतिहास के पन्नों में इंगित हो गया।

 दिल्ली की NIA अदालत ने जम्मू कश्मीर में होने वाली आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों से संबंधित एक मामले में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक सहित 15 आरोपियों के खिलाफ UAPA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। आपराधिक साजिश के लिए अदालत ने आरोप तय किए हैं।अदालत ने यह कहा कि भारत से जम्मू-कश्मीर को अलग करने के अंतिम उद्देश्य के साथ एक साजिश रची गई थी। उन सभी कृत्यों को आतंकवादी जांच के बाद आतंकवादी कृत्य माना गया। अदालत ने पहली पहले यह पाया कि यह एक अपराधिक साजिश थी जिसके तहत बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए, जिसका परिणाम स्वरूप बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी हुई।


यह तर्क दिया गया कि “यह गांधीवादी मार्ग का अनुसरण करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए थे।” हालांकि, सबूत कुछ और ही बयां कर रहे हैं। यह सिर्फ मासूम पंडितों की हत्या करना था। यह केवल हिंसा विरोधी थे, जिनका इरादा कश्मीर को भारत से अलग करना था। आपको बता दें कि यूपीए शासन में यासीन मलिक को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सम्मानित किया था। आज वह यासीन मलिक कानून की बेड़ियों में जकड़ चुका है

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