यूँ ही कोई गुप्तेश्वर पांडेय नहीं हो जाते.........!! बिहार पुलिस कैडर के डीजीपी पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत IPS अधिकारी श्री गुप्तेश्वर पाण्डेय जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर बिहार के चर्चित चेहरे के बारे में बताए हैं। बिहार में मनीष कश्यप नाम के एक पत्रकार हैं । अभी एक डॉक्टर साहेब ने बताया कि पाकिस्तानी सेना के जनरल मौलाना मुनीर से मनीष के निजी संबंध है । पाकिस्तानी जनरल ने भारत सरकार के ऑपरेशन सिंदूर का बदला लेने के लिए पटना के मनीष कश्यप को सेट कर गोला ,बम ,बारूद ,मिसाइल और एटम बम के साथ अकेले पटना PMCH (patna medical college and hospital ) को उड़ाने के लिए भेज दिया । मनीष को पीएमसीएच पर हमला कर उसको उड़ाना था । सैकड़ों डॉक्टर और हजारों मरीज की जिंदगी खतरे में थी।इसी बीच पीएमसीएच के डॉक्टरों को जनरल मुनीर की साजिश का पता चल गया । सैकड़ों देश भक्त डॉक्टरों ने अपनी जान को जोखिम को डाल कर देश के लिए शहादत देने का संकल्प लेते हुए बम गोली मिसाइल की परवाह किए बिना मनीष कश्यप पर हमला कर दिया जो अकेले थे । उनको घायल किया लेकिन चूँकि वो हिंसा में विश्वास नहीं करते इसलिए मनीष की हत्...
गया शहर का नाम बदला, सरकार ने दी मंजूरी बिहार के कई शहर पौराणिक , ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इसी उद्देश्य से बिहार के एक महत्वपूर्ण शहर का नाम बदल दिया है। ये शहर पहले गया नाम से जाना जाता था लेकिन अब इसका नामकरण ' गया जी ' कर दिया गया है। इसका कारण भी ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक है। गया शहर नामकरण के मद्देनजर बिहार सरकार के सचिव मोहम्मद सोहेल के द्वारा प्रेस नोट जारी कर इसकी सूचना दी गई है। आम लोग इसे हमेशा से 'गया जी' ही कहते आ रहे थे। लेकिन सरकार ने लेटर जारी कर इस पर अपनी मुहर लगा दी है। गया शहर प्रमुख रूप से तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है । प्रमुखतः हिंदू धर्म के लिए। यहां फल्गु नदी के किनारे विष्णु पद मंदिर है । जहां हिंदू लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करते है। यहां भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है जहां उनका चरण है। ऐसे गया शहर का नाम आज गया सुर नामक राक्षस के नाम पर पड़ा था। ऐसे आज भी कहा जाता है कि यह शहर गया सुर के पीठ पर बसा है। गया में विष्णु पद मंदिर, पित...
न्याय के प्रहरियों का न्याय के लिए शंखनाद: बिहार के सिविल कोर्ट कर्मचारियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल पटना | 15 फरवरी 2026 बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का औपचारिक ऐलान कर दिया है। संघ के अध्यक्ष श्री राजेश्वर तिवारी के नेतृत्व में पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत पत्र भेजकर अधीनस्थ अदालतों में व्याप्त 'घुटन और बेबसी' की स्थिति से अवगत कराया गया है। 20 वर्षों का इंतजार और मानसिक यातना: संघ के अध्यक्ष श्री राजेश्वर तिवारी और महासचिव श्री सत्यार्थ सिंह ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों में कर्मचारी अमानवीय परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। पिछले दो दशकों से प्रोन्नति का न मिलना, वेतन विसंगतियां और पदों का वर्गीकरण न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अभिलेखों के अत्यधिक भार और संसाधनों की कमी ने न्यायिक कार्य को 'मानसिक यातना' बना दिया है। इसके अलावा, अनुकंपा नियुक्ति में हो रहे विलंब ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक बदहाली में झोंक दिया है। उच्च न्यायालय से न्याय...
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